पहले यंत्र देखें, फिर ट्रैक्टर
ट्रैक्टर अपने आप में कुछ नहीं करता — असली काम यंत्र करता है। आप साल भर कौन-कौन से यंत्र चलाएँगे, उनमें सबसे भारी यंत्र जितनी PTO पावर माँगता है, उतना ट्रैक्टर लें।
मोटा हिसाब
- 20–30 HP: बाग़, सब्ज़ी, अंतर-फ़सल और 2–3 एकड़ तक के खेत
- 31–40 HP: 3–8 एकड़, कल्टीवेटर, छोटा रोटावेटर, ढुलाई
- 41–50 HP: 8–15 एकड़, 6–7 फ़ीट रोटावेटर, सीड ड्रिल, थ्रेशर
- 51 HP से ऊपर: सुपर सीडर, बेलर, भारी मिट्टी, गन्ना और किराये पर काम
इंजन HP नहीं, PTO HP देखें
कंपनियाँ इंजन HP बताती हैं, पर यंत्र को PTO HP मिलता है — यह आम तौर पर इंजन HP का 85–90% होता है। अनुदान की सीमा भी PTO HP से तय होती है।
2WD या 4WD?
गीली धान की खेती, ढलान वाली ज़मीन और भारी यंत्र के लिए 4WD पकड़ बेहतर देता है, पर क़ीमत लगभग ₹1–1.5 लाख ज़्यादा होती है। सूखी, समतल ज़मीन पर 2WD काफ़ी है।
अनुदान पर एक बात
SMAM दिशानिर्देश 2025 के अनुसार 40 PTO HP से बड़े ट्रैक्टर ज़्यादातर कस्टम हायरिंग सेंटर के ज़रिये दिए जाते हैं। अकेले किसान को 40 PTO HP तक के ट्रैक्टर पर अनुदान मिलना आसान है।
