रोटावेटर
एक या दो बार में खेत को भुरभुरा कर देता है, ठूँठ और अवशेष मिट्टी में मिला देता है। धान के बाद गेहूँ, सब्ज़ी और गन्ने में ख़ूब चलता है। पर ज़्यादा HP और ज़्यादा डीज़ल लेता है, और हर साल चलाने से नीचे सख़्त परत बन सकती है।
कल्टीवेटर
मिट्टी को तोड़ता और ढीला करता है, खरपतवार निकालता है। कम HP और कम डीज़ल में ज़्यादा एकड़ करता है और सस्ता है। बारीक बुवाई के लिए दो-तीन बार चलाना पड़ता है।
कब कौन
- धान के बाद समय कम हो और अवशेष ज़्यादा हों: रोटावेटर
- सूखी, हल्की मिट्टी और कम बजट: कल्टीवेटर
- 35 HP से कम ट्रैक्टर: कल्टीवेटर या 4–5 फ़ीट का हल्का रोटावेटर
- दोनों पर SMAM अनुदान मिलता है — रोटावेटर की सीमा ज़्यादा है
